
Rajasthan राजस्थान: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत ने एक बड़े वैश्विक ऊर्जा संकट से सफलतापूर्वक निपटा है और इस दौरान देश की जनता पर इसका प्रभाव न्यूनतम रहा। उन्होंने कहा कि यह सफलता सरकार की प्रोएक्टिव पॉलिसी, ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और मजबूत कूटनीतिक संबंधों की वजह से संभव हो पाई है।
प्रधानमंत्री राजस्थान के बालोतरा जिले के पचपदरा में एक रिफाइनरी के उद्घाटन कार्यक्रम के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कई अन्य विकास परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी और देश की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर विस्तार से बात की।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा संकटों में से एक को झेला, लेकिन सही समय पर लिए गए फैसलों की वजह से स्थिति को नियंत्रण में रखा गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए विभिन्न देशों से आयात बढ़ाया और वैकल्पिक स्रोतों पर भी तेजी से काम किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान भारत ने अपने ऊर्जा आयात को रणनीतिक रूप से बढ़ाया और सप्लाई चेन को बाधित होने से बचाया। उन्होंने कहा कि भारत ने केवल एक ही स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय कई देशों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की, जिससे जोखिम कम हुआ।
उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति अब केवल आयात पर निर्भर नहीं है, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा, घरेलू उत्पादन और वैकल्पिक ईंधन स्रोतों पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है और भविष्य के लिए एक स्थिर ढांचा तैयार हुआ है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की नीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वैश्विक संकट का सीधा असर आम नागरिकों पर न पड़े। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने लगातार प्रयास किए हैं कि ईंधन की उपलब्धता बनी रहे और कीमतों में स्थिरता आए।
पचपदरा रिफाइनरी के उद्घाटन को उन्होंने देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाएगी बल्कि क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कई अन्य विकास परियोजनाओं की भी नींव रखी, जिन्हें उन्होंने राजस्थान और देश के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक बुनियादी ढांचे और ऊर्जा परियोजनाएं भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में ला रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की ऊर्जा नीति में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखा गया है, जिसमें आयात निर्भरता को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसी रणनीति ने वैश्विक संकट के दौरान देश को स्थिर बनाए रखने में मदद की है।
प्रधानमंत्री के इस बयान को भारत की ऊर्जा रणनीति की सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें आर्थिक स्थिरता और नागरिक हितों को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में भारत ऊर्जा क्षेत्र में और अधिक आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति और वैश्विक चुनौतियों के बीच देश की मजबूती को दर्शाता है, जिसमें संतुलित नीति और रणनीतिक निर्णयों की अहम भूमिका रही है।





